बाहरी लोगों का गांवों में प्रवेश पर लगाया प्रतिबंध
मेरठ। कभी ऐसा भी समय था जब कोई शहर से, नौकरी से गांवघर आता था तो उसका परिवार के सदस्यों के साथ गांव-कुटुंब के लोग स्वागत करते थे। लोग पूछते थे-कहो परदेसी बड़े दिन बाद आये हो, कैसे हो? अब इस कोरोना के भयावह माहौल में सब कुछ बदला-बदला सा नजर आ रहा है।
दिल्ली, नोएडा, गाजियाबादपंजाब, मुम्बई आदि स्थानों से अपने गांव-घर को लौटने वालों के साथ अजनबी जैसा व्यवहार हो रहा है। अब सवाल उठ रहे हैं- कहो परदेसी क्यों आये हो? तुम जहां थे,वहीं रहते, अब तुम्हारे आने से कोई सुखद अनुभूति नहीं हो रही। लोगों को परदेशियों से डर लगने लगा है। यह स्थिति कमोवेश देश के सभी हिस्सों में हो गया हैबाहर से आने वाले लोगों को कोरोना बम की भांति देखा जा रहा है। जब से दिल्ली के निजामुद्दीन सहित विभिन्न स्थानों के मरकज से निकल पर देश कोने-कोने में फैल चुके लोगों की घटना सामने आई है, पूर्वांचलझारखंड, बिहार यहां तक कि मेरठ में बाहर से आने वालों को शंका की निगाहों से देखा जा रहा है। हालांकि सुरक्षा के ख्याल से सोचें तो बहुत हद तक यही सही भी है, लेकिन दिल्ली, नोएडा, हरियाणा आदि स्थानों से रातो-रात पलायन करने वाले लाखों लोग जब अपने गांव-घर पहुंच रहे ,वहां उनकी स्थिति अजनबियों की तरह हो गई है। वहां उनका कोई स्वागत नहीं कर रहा।
हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि झारखंड के सुदूर इलाकों में रहने वालों को रांची जाकर कोरोना की जांच करवाने के बाद गांव में प्रवेश करने दिया जा रहा है। जब तक जांच रिपोर्ट नेगेटिव नहीं मिल रही, तब तक बाहरी लोगों को कोई अपना नहीं रहे है।
एक अपुष्ट आंकड़े यह बताते हैं कि लॉकडाउन के दौरान दिल्ली से वापस लौटे 10 फीसदी लोगों में कोरोना होने की संभावना हो सकती है। इस खबर ने ग्रामीण अंचलों को हिला कर रख दिया है। गांव में किसी भी बाहर से आने वाले व्यक्तियों का प्रवेश रोक दिया गया है। कुछ लोग चुपके से घरों में पहुंच गये हैं, लेकिन जैसे ही गांव वालों को इसकी जानकारी मिल रही है, वह ऐसे लोगों को बाहर निकाल रहे हैं। यही नहीं जिन लोगों के सदस्य शहरों में रहते हैं, उन्हें यह कह दिया गया है कि वे लोग इन परिस्थितियों में गांव की ओर लौटने की कोशिश न करें। जैसे ही यह खबर झारखंड के सुदूर इलाकों में पहुंची कि मेरठ जिले के विभिन्न स्थानों से 140 जमाती मिले हैं जिसमें से 20 लोग झारखंड से थे। वे जमाती मवाना में 20 मार्च को आये थे, लोगों के बीच दहशत का माहौल बन गया है।
इसके बाद गांव में लोगों का प्रवेश बंद करवा दिया है। ग्राम प्रधानों ने क्षेत्र में मुनादी करवा लोगों को आगाह भी किया है कि किसी भी व्यक्ति को गांव में प्रवेश नहीं करने दिया जाये। गांवों से शहरों में रहरहे लोगों को फोन आने लगे हैं कि आपलोग अब जहां हो वहीं रहो, क्योंकि अब यहां लौटने से पहले कोरोना का पॉजिटिव टेस्ट का प्रमाण पत्र के बाद ही गांव में प्रवेश करने दिया जाएगा। ऐसे हालात में शहर में रह रहे लोग जो परिशानियों के दौर से गुजर रहे हैं, वहदो पाटों के बीच पीसने के लिये मजबूर हो गये हैं।